April 12, 2007

आत्‍महत्‍या से पहले विदर्भ के किसान की चिटठी


To,
Police Station Officer,
Police Station,
Wadgoan,

I humbly submit that applicant govinda zeetruji junghare at-post- mettikheda taluka-kalamb distt.-yavatmal.
Subject-my family shocked as farm land is without being sowing any crop. Who can we live without doing farming?

I have no bullock for farming my land;
I have no money for seed, what is to be done?
I can not think more. Money lenders are daily coming to my home at abusing me I tried to arrange to money to repay but I could not arrange to money.

I did apply for crop loan case in bank but banker too has not given me the money yet.

Money Leander has threatened me to arrange the money otherwise they will take away tinplates fitted to my house.
But I am not having five paisa today how can repay my loan,

I think over this crisis lot of time and then decided I should die instead of living I should hang myself or take poison to die. Money Leander REKHA NAMDEO NIKHADE'S debt RS.5000/- has a quarrel with me and manager of money Leander nurruseth is always keeping to my house to asking for RS.4000/- to pay back this has made me mad.

No banker has given me the loan.

I have my wife two son and marriageable daughter and how to do daughter's marriage,

I have no money at home one son is critical ill and suffering from T.B.
Nobody should trouble my family hence I have written this letter in detail

Yours faithfully
Shri Govinda Zeetruji Junghare

8 comments:

Srijan Shilpi said...

मैं यह जानना चाहता हूं कि क्या यह पत्र किसान की आत्महत्या के बाद पुलिस और प्रशासन के हाथ लगा? क्या उसके आधार पर कोई कार्रवाई शुरू हुई है?

आप स्वयं मुख्यधारा की मीडिया के एक असरदार पत्रकार हैं। क्या आपका चैनल इसको ख़बर बनाने के लिए तैयार है? चिट्ठा जगत के पाठक उस किसान के परिवार के साथ सहानुभूति जताने और व्यवस्था के प्रति आक्रोश जताने के सिवाय क्या कर सकते हैं?

लेकिन, आपने इस पत्र को यहां प्रकाशित करके बहुत सही काम किया है। दरअसल यही असली चिट्ठाकारी है। जिस सच को मुख्यधारा की मीडिया नजरंदाज करती है, उस सच को चिट्ठाकार ही सामने ला सकते हैं।

Aflatoon said...

जान-माल की रक्षा के लिए जिम्मेदार पुलिस से लगा कर नीतिनिर्माताओं तक कोई भी किसानों की खुदकुशी पर सही कदम उठाने या समझ बनाने मेम असमर्थ हैं । प्रधानमंत्री के तथाकथित विदर्भ राहत पैकेज के बाद से खुदकुशी करने वालों की तादाद बढ़ी भले हो,सरकार खुले बाजार की नीति से इन मौतों के नाते को जानबूझ कर नहीं देखना चाहती।तालुका स्तर पर तहसीलदार आदि सरकारी कारिन्दों द्वारा 'खुदकुशी रोकने के लिए पाठ' जैसे कार्यक्रम कराना कितना बड़ा अन्याय है ?

Anonymous said...

Thanx for the life-related news Bhrata.

But the world in which we people live, really has enough time and wish to think about life and welfare ??????????
The same dialogue - Saala mar gaya, .....................
Media too will enjoy as long as the news will earn for them, and then the other money making plan ,,,,,,,,,,,,,,,, yaah only plans , selfish plans ..................... what'll happen to his family,, no-one bothers......... Media will not reach at the real solution and implement the plan, but only sell many plans...................... as only plans [not implementation] sell more
Media should be thankful for the couragious man as it will live on the headline of his death. ...Saala Bhala Aadmi, ....Apna family ka bhi kuchh nahi socha, ,,, , sirf Media ke Bhale ke liye Mar gaya Saala.................

There are many suffering people , many Govinda Junghares here, but they can't get headlines,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, because we, the Media-people pretend to devote for LIFE, but ........... but in reality adore only DEATHS...........................as they earn more for us .................. We don't bother the lives even more bitter and painful than the real death.....................................
pitifully ..................Not life, but deaths make headlines.............................Ha Ha Ha...................
O my God wt.?????????????????????????????????????

Oh God,,,,,,,,,,,,,,,,,,Save the Humanity.....................
Any way......... Now the departed soul will definitely rest in peace................

विशाल सिंह said...

यह विचलित कर देने वाली घटना है, खासकर तब जब देश का एक तबका इण्डिया प्वाएज्ड और शाइनिंग जैसे जुमलों से अपनी पीठ ठोंक रहा है। कृषि मन्त्री के गृह प्रदेश के विदर्भ में इतना सब कुछ हो जाता है और उन्हें क्रिकेट की राजनीति से अवकाश नहीं मिलता। प्रधानमंत्री द्वारा घोषित हजारों करोड के पैकेज में से बस छंटाक भर ही आवंटित हुआ है। पैकेज में भी छोटी देनदारियों को माफ करने के बजाय, कर्ज़ पर ब्याज माफ किया गया है जिससे बडे किसानों का तो फायदा होगा। इसकी बजाय २५ हजार तक के कर्ज़ माफ करने चाहिए थे। सहायता के रुप में किसानों को दुधारु पशु देने से भी उलटे नतीजे सामने आ रहे हैं, जब किसानों के पास अपने खाने को नहीं है तो पशुओं को अनाज कैसे खिलायेंगे, नतीजन पशुओं की हालत भी खराब हो रही है। इसकी बजाय देसी नस्ल की कम दूध वाली और कम खुराक की गाय उनके लिए बेहतर रहती। जो दूध निकाल भी रहे हैं उन्हें खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुल मिला के नीतिगत स्तर पर भयानक लापरवाही है।
आपने यह पत्र प्रकाशित करके बहुत अच्छा किया। मीडिया को सामने आना चाहिए। आश्चर्य है कि किस सेलेब्रेटी ने कब क्या खाया, यह खबर बन जाती है लेकिन गरीब किसानों की आत्महत्या की खबर बाजार में बिकती नहीं है।

अभय तिवारी said...

धिक्कार है जैसा कुछ कहना चाह्ता हूँ.. पर किसे कहूँ.. कौन सुनने वाला है.. जो सुन भी लेगा.. वो कोट पर आ पड़ी धूल की तरह झाड़ कर एसी कार में कोला पीते हुये चला जायेगा..ना जाने असली ब्लू बिलियन कब बोलेगा..?

अतुल शर्मा said...

लगता है कुछ लोग बीसवीं से इक्कीसवीं सदी में आए हैं परंतु बहुसंख्य लोगों को बीसवीं से उन्नीसवीं में धकेल कर।
लानत है हम सब पर।

Raag said...

शर्मनाक वाकया।

Shrish said...

धिक्कार है ऐसी सरकार पर जिसके राज में सिर्फ ५००० रुपए के लिए एक इंसान को आत्महत्या करनी पड़े। क्या लाखों के घोटाले करने वाले नेताओं के पास उसका इतना कर्जा माफ करने लायक भी पैसे नहीं थे।