राजस्थान की राज्य की आबादी तकरीबन 56473122 है और इस आबादी का सात से आठ फीसदी हिस्सा गुर्जर समाज का है। गुर्जर समाज पांच फीसदी आरक्षण चाहता है लेकिन भाजपा सरकार रही हो या मौजूदा कांग्रेस सरकार। वोट लेने के लिए आश्वासन सभी ने दिए लेकिन किया धरा कुछ नहीं। सरकारों के बेवकूफ बनाओ इरादे तंग आकर गुर्जर समाज बार बार आंदोलन करता रहता है ताकि पांच फीसदी आरक्षण मिल जाएं लेकिन इस बार राजस्थान हाईकोर्ट ने कह दिया कि एक फीसदी से अधिक कुछ नहीं मिल सकता। बस, बात फंस गई, नेता अड़ गए। मनाने, रुठने के कार्यक्रम हुए एवं हो रहे हैं। गुर्जरों को भी साफ साफ बता देना चाहिए आरक्षण मिलेगा या नहीं।लेकिन अहम बात यह है कि राजस्थान की 92-93 फीसदी जनता को परेशान करने का हक गुर्जर समाज को किसने दिया। आम आदमी तंग हो गया है। खाद्य सामग्री की सप्लाई लाइन बिगड़ गई है। ट्रेनों, बसों और मालवाहक वाहनों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। बीमार आदमी एक जगह से दूसरी जगह जा नहीं सकता। बसों और हवाई यातायात के भाड़े में जमकर लूट चल रही है और यह बात सरकार को पता है लेकिन मौन बैठी हुई है। किसने हक दिया इस गुर्जर समाज को राजस्थान की बहुसंख्यक आबादी को परेशान करने एवं बंधक बनाने का। राजस्थान सरकार एवं राजस्थान हाईकोर्ट को इस दिशा में पहल करनी चाहिए कि आंदोलन करते रहो लेकिन आम आदमी को जरा भी परेशानी नहीं होनी चाहिए। नौकरी में आरक्षण के लिए इतना परेशान कर रहे हैं, नौकरी पा गए तो कितना परेशान करेंगे।
गुर्जर इस बात से शायद वाकिफ नहीं है कि जनता खड़ी हो गई तो वे कहीं के न रहेंगे। राजस्थान की जनता को इन गुर्जरों से हो रही परेशानी के खिलाफ आंदोलन करना चाहिए। दूसरी जातियों को इन गुर्जरों को पहले साफ संकेत देना चाहिए कि 24 घंटे में हमारी परेशानियां बंद करों अन्यथा जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार रहो। सरकार को टालमटोल एवं गोल गोल जवाब और बातचीत को बंद कर साफ बताना चाहिए कि क्या हो सकता है और क्या नहीं। किसी भी समाज को बेवकूफ न बनाएं। हां, अगली बार कांग्रेस राजस्थान में सत्ता में नही आना चाहती हो तो इस रवैये को चलने दे।
ताज्जुब होता है कि राजस्थान में अभी तक किसी ने भी जनहित याचिका दाखिल नहीं कि 92-93 फीसदी जनता को जो परेशानी हो रही है उस पर सरकार से एक्शन लेने को कहा जाए। सोचिए, 7-8 फीसदी जनसंख्या ने एक विशाल आबादी को बंधक बनाने और हैरान करने के सिवा किया क्या।



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आपके ब्लॉग की पोस्ट की चर्चा हमारीवाणी ई-पत्रिका में हुई है.
http://news.hamarivani.com/archives/792
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