यदि देश के किसी नेता को यह पूछा जाए कि उसे चुनाव में केवल एक वोट अधिक न मिले तो क्या होगा, शायद पहली नजर में वह इसे नजरअंदाज कर दें और कह भी दें कि एक वोट उसे न मिला तो भी चलेगा क्योंकि वह बड़े अंतर से जीत का माद्दा रखता है। लेकिन यही बात यदि राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सी पी जोशी से कोई पूछे कि एक वोट की कीमत क्या होती है। इस सवाल का जवाब जोशी से बेहतर शायद ही कोई नेता दे पाएगा जिसने उन्हें न केवल राज्य का मुख्यमंत्री बनने से अटका दिया बल्कि विधानसभा में बैठने से ही रोक दिया। राजसमंद जिले की नाथद्वारा सीट से जोशी चुनाव हार गए हैं। जोशी मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में शुमार थे। वे काफी दुर्भाग्यशाली रहे। वे केवल एक वोट से चुनाव हारे हैं। जोशी को भाजपा के कल्याण सिंह ने हराया। कल्याण को 62 हजार 216 वोट मिले। जबकि सी पी जोशी को 62 हजार 215 वोट ही मिल पाए। देश के सारे नेता इससे सबक लेंगे कि एक वोट ही उनको दिन में तारे दिखाने के लिए खूब है।December 8, 2008
एक वोट ने दिन में दिखा दिए तारे
यदि देश के किसी नेता को यह पूछा जाए कि उसे चुनाव में केवल एक वोट अधिक न मिले तो क्या होगा, शायद पहली नजर में वह इसे नजरअंदाज कर दें और कह भी दें कि एक वोट उसे न मिला तो भी चलेगा क्योंकि वह बड़े अंतर से जीत का माद्दा रखता है। लेकिन यही बात यदि राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सी पी जोशी से कोई पूछे कि एक वोट की कीमत क्या होती है। इस सवाल का जवाब जोशी से बेहतर शायद ही कोई नेता दे पाएगा जिसने उन्हें न केवल राज्य का मुख्यमंत्री बनने से अटका दिया बल्कि विधानसभा में बैठने से ही रोक दिया। राजसमंद जिले की नाथद्वारा सीट से जोशी चुनाव हार गए हैं। जोशी मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में शुमार थे। वे काफी दुर्भाग्यशाली रहे। वे केवल एक वोट से चुनाव हारे हैं। जोशी को भाजपा के कल्याण सिंह ने हराया। कल्याण को 62 हजार 216 वोट मिले। जबकि सी पी जोशी को 62 हजार 215 वोट ही मिल पाए। देश के सारे नेता इससे सबक लेंगे कि एक वोट ही उनको दिन में तारे दिखाने के लिए खूब है।December 6, 2008
अच्युतानंदन मुख्यमंत्री न होते तो कुत्ता भी उन्हें नहीं जानता
केरल के मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन ने अनमना होकर मुंबई आतंकी हमलों में शहीद हुए मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के घर के बारे में की गई टिप्पणी पर खेद तो प्रकट कर दिया। लेकिन देश के इस साक्षर प्रदेश के मुख्यमंत्री से पहले तो ऐसे बयान और इसके बाद अनमना होकर माफी मांगना अच्छी बात नहीं कही जा सकती। अच्युतानंदन सत्ता के मदहोश में है और इसी वजह से वे ज्यादा ही बक गए। गौरतलब है कि मेजर संदीप के पिता द्वारा मिलने से इनकार करने के बाद अच्युतानंदन ने कहा था, ‘अगर वह (मेजर) संदीप का घर नहीं होता तो, वहां कुत्ता भी न जाता।’ अब इस पर यह कहा जा सकता है कि यदि अच्युतानंदन केरल के मुख्यमंत्री न होते तो उन्हें कुत्ता भी नहीं जानता। अच्युतानंदन, यह जनता है जिसने आप जैसे बिगड़लों को ऐसा कुत्ता बनाया है अपने वोट के माध्यम से जो घर का रहा न घाट का। समझ गए ना!
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