
संसद से जेल का सफर करने वाले सांसद बाबूभाई कटारा के खिलाफ हर कोई इस समय बोल रहा है। लेकिन हमने उनसे कुछ हमदर्दी जताते हुए सोचा चलो जेल की यात्रा कर आएं और बाबूभाई से मिल भी आएं कि उनके धंधे को चौपट करने वालों को क्या मिला। चाहते तो उनकी भी बीबी, बच्चों को बाबूभाई को सौंप देते, वे इतने भले सांसद हैं कि उन्हें विदेश छोड़ आते ताकि भारत की कुछ जनसंख्या तो कम हो जाती। अब तो सारी जांच एजेंसियां पीछे ही पड़ गई, जो जो लोग कबूतरबाजी कर रहे थे उनके। अरे भाई कबूतर दूसरों तक पहले के जमाने में हमारे संदेश ले जाते थे, लेकिन बाबूभाई तो संदेश भेजने वाले और संदेश पाने वाले को साक्षात मिलाने का काम कर रहे थे, तो कैसा ऑब्जेशन सरकार को। हां, जो पैसा उन्होंने लिया, उसके लिए तो कहा जाता है करो सेवा तो मिलेगा मेवा...अब मेवा मिल रहा था तो उनका क्या दोष। बाबूभाई के साथ बहुत बुरा हुआ। ऐसी ढ़ेरी सारी बातें सोचते सोचते पहुंच गए बाबूभाई की जेल कोठरी के पास। बोला...बाबू मैं आया हूं...मुंबई से आपका एक हितैषी। उन्होंने मेरी तरफ देखा कि कोई अपने पैसे वसूल करने आ गया क्या कबूतर। मैंने कहा सारा देश आपको कोस रहा है, लेकिन मैं आपके दर्द को समझता हूं, आप तो देश की जनसंख्या कम करने की सेवा कर रहे थे। आपका एक इंटरव्यू लेना चाहता हूं...बाबू बोले इंटरव्यू फिर कभी....मैंने जेल में एक पाठय पुस्तकों में छपने वाली प्रतिज्ञा की तरह एक रचना लिखी है, उसे ले जाओं और छाप दो...क्योंकि मेरे पास इस समय टाइम नहीं है इंटरव्यू के लिए। अभी पुलिस छानबीन के लिए जाना भी है। हमने वह रचना ले ली जो जेल में उनकी पहली रचना है।
प्रतिज्ञा
भारत मेरा देश है लेकिन बदनाम करने के लिए। समस्त भारतीय मेरे क्लायंट हैं विदेश जाने के लिए। समस्त महिलाएं मेरी बीबियां हैं और उनके बच्चे मेरे कबूतर। मुझे अपने देश से प्यार है क्योंकि मैं अपने देश को चूसता हूं पैसे के लिए। अपने देश के बजाय खुद को समृद्ध और विविधताओं से विभूषित करना मेरा मकसद है। मैं हमेशा प्रयत्न करुंगा कि देश की सारी परंपराएं और इज्जत को दुनिया की नजर में मिट्टी में मिलाने की क्षमता को बढ़ाऊं और इसके लिए सब कुछ करुंगा। मैं अपने माता पिता, गुरुजनों और बड़ों को देश से अवैद्य ढंग से विदेश ले जाने और पैसे बटोरने का काम करुंगा और हर एक से क्लायंट जैसा व्यवहार करुंगा। मैं प्रतिज्ञा करता हूं कि मैं अपने देश और अपने देशवासियों की इज्जत को धूल में मिलाऊंगा। उनकी बेइज्जती और बुराई में ही मेरा सुख निहित है।




1 comments:
सुन्दर रचना. आपका लिखा नहीं भाई, कटाराजी की प्रतिज्ञा की बात कर रहा हूँ. :)
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