उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजों ने टीवी मीडिया के एग्जिट पोल के साथ खुद उनकी विश्वसनीयता को ही सवालों को घेरे में खड़ा कर दिया है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जो तगड़ा उल्टफेर हुआ, उसके बाद मायावती ने भी मीडिया को जो नसीहत दी, वह सही थी। इस चुनाव में किसी भी मीडिया हाउस ने उन्हें वह अहमियत नहीं दी, जो राहुल गांधी (वह देश के अगले प्रधानमंत्री हैं), मुलायम-अमर सिंह और अमिताभ बच्चन (बड़े लोग, बड़े बोल) और भाजपा (कहीं राजनाथ सिंह, अरुण जेटली और कल्याण सिंह अगली बार केंद्र में आ गए तो कुछ भला ही कर दें) को दी गई। मायावती और उनके हाथी की ताकत को मीडिया खासकर इलेक्ट्रॉनिक ने न तो जाना और न पहचाना। मुझे तो लगता है कि मीडिया ने उन पार्टियों को अपने चुनावी पोल में अहमियत दी जहां उन्हें अप्रत्यक्ष रुप से कुछ फायदा दिखा हो। बुरा न मानें...और मानना हो तो मान लें...देश के कई अखबार तो चुनावों के मौसम में पैसा लेकर खबरें छापते हैं उम्मीदवारों और पार्टियों की...पैसे की ताकत से लगी खबरों के असर को आसानी से जाना जा सकता है क्योंकि ऐसी खबरें आम आदमी समझता है। वह मूर्ख नहीं है कि इन खबरों के असर में अपने कीमती वोट की ऐसी तैसी कर दें।मुझे लगता है कि चुनावी सर्वे में भी यही काम हुआ होगा..तभी तो सारे विश्लेषक फेल हो गए। इस तरह के सर्वे पर रोक लगनी चाहिए, फालतू के लोग आकर बैठ जाते हैं और बताते हैं कि यदि ऐसा होगा तो ऐसा हो जाएगा और यदि ऐसा हुआ तो यह होगा। मतदाता के मन को कोई नहीं जान सकता। जब मैं छात्र तो था, कुछ लोगों ने कई बार मुझे भी सर्वे में पूछा था और मैंने सारी जानकारियां गलत दी। शायद सर्वे गलत हुए होंगे उनके तब। मै एक मतदाता के तौर पर सच्चाई क्यों बताऊं और यह जानने का किसी को भी कानूनी अधिकार नहीं है। मीडिया इस तरह के सर्वे के बजाय कुछ सार्थक रिपोर्ट या फिर दलों के बीच किसी मुद्दे पर बहस दिखाता तो ज्यादा अच्छा रहता।
जयपुर से प्रकाशित राजस्थान पत्रिका ने एक बार इसी तरह का गलत सर्वे छापा था और आम जनता का आक्रोश उसे झेलना पड़ा साथ ही पहले पेज पर माफी मांगनी पड़ी। कभी जनता गले न पड़ जाए...यदि अनुभव न हो तो राजस्थान पत्रिका से पूछ लेना कि जब जनता अपनी पर उतरती है तो कैसा अनुभव होता है। गलत सर्वे के लिए अब तक कितने टीवी चैनलों ने माफी मांगी है, एक बड़ा सवाल है। गुजराती अखबार गुजरात समाचार ने आज एक खबर इसी पर लिखी है, जिसमें कहा गया है कि लोगों में यह चर्चा है कि राजनीतिक दलों ने पैसे देकर सर्वे प्लांट कराए होंगे।
गुजरात समाचार ने लिखा है कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तो रोज 10/15 घंटे बताता है कि सबसे सेक्सी अभिनेत्री कौन, सर्वाधिक लोकप्रिय मुख्यमंत्री कौन, शिल्पा शेट्टी को रिचर्ड गियर ने किस किया, क्या वह अनैतिक कहा जाएगा। ऐसे बकवास विषयों पर फिर लोगों से उनकी राय एसएमएस के माध्यम से मंगाई जाती है और देशभर से लाखों मूर्ख एसएमएस करते हैं जिसकी लागत छह से आठ रुपए प्रति एसएमएस होती है। यह आय मीडिया कंपनी और मोबाइल कंपनी के बीच बंटती है, जबकि इतने लोगों के नाम टीवी पर आते ही नहीं। केवल यह बताया जाता है कि 60 फीसदी क्या कह रहे हैं और 40 फीसदी क्या। जबकि इसी खेल में रोजाना लाखों रुपए का धंधा हो जाता है। अब हर कोई जानता हैं कि मीडिया अगली बार मायावाती के पीछे होगा और आम जनता तब क्या करेगी कोई नहीं जान सकता।




3 comments:
यह तो पोल खोल हो गई.
पाठक बताए की कमलजी का कहना सही है या नहीं, एक छह रूपैये वाला एस एम एस मुझे करें...और अपनी कीमती राय दें.
कमल जी आपका कथन अक्षरश्य सत्य है आज यही हो रहा है हर आदमी लकीर का फ़कीर है,..
बेवकूफ़ लोगो का कोइ ईलाज़ नही मोबाईल पर एस एम एस करना ऐक फ़ैशन बन गया है,..ये भी सच है आज मीडीय़ा हर जगह पहुँच गया है जिसके पास पैसा है वह अपनी खबर को मीडिया को दे सकता है,..खबर कोई नही जो ज्ञान-वर्धक हो,..मगर फ़िर भी जिसकी लाठी उसकी भैस ही सही है,....अथार्त या तो पैसा हो या तानाशाही हो बस मीडिया भी उसी के गीत गाता है,..दिन भर या तो शिल्पा शेट्टी को रिचर्ड गियर ने किस किया,या एश्वर्या अभिषेक की शादी टीवी पर देखने को मिलती है,..
सुनीता(शानू)
कमल जी कुछ जुगाड लगाओ ना भाई कि यहा भी लोग टिपियाने के बजाये sms किया करे कुछ हम लोगो का भी भला हो
फ़िर यहा भी लोग भी देश की समस्याओ पर लिखने लगेगे कौन सी हिरोईन क्या कर रही है किस बडी हस्ती के बेटे की शादी है कौन सा खिलाडी क्या खाता है सबसे सेक्सी कुत्ता कौन है और किसके पास है देश हितके बहुत सारे सवाल यहा भी उठने लगेगे बस जरा माल पानी का जुगाड हो जाये
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