May 7, 2007

बाबूभाई कटारा का पत्र देश के नाम


भारत मेरा देश है लेकिन बदनाम करने के लिए। समस्‍त भारतीय मेरे क्‍लायंट हैं विदेश जाने के लिए। समस्‍त महिलाएं मेरी बीबियां हैं और उनके बच्‍चे मेरे कबूतर। मुझे अपने देश से प्‍यार है क्‍योंकि मैं अपने देश को चूसता हूं पैसे के लिए। अपने देश के बजाय खुद को समृद्ध और विविधताओं से विभूषित करना मेरा मकसद है। मैं हमेशा प्रयत्‍न करुंगा कि देश की सारी परंपराएं और इज्‍जत को दुनिया की नजर में मिट्टी में मिलाने की क्षमता को बढ़ाऊं और इसके लिए सब कुछ करुंगा। मैं अपने माता पिता, गुरुजनों और बड़ों को देश से अवैद्य ढंग से विदेश ले जाने और पैसे बटोरने का काम करुंगा और हर एक से क्‍लायंट जैसा व्‍यवहार करुंगा। मैं प्रतिज्ञा करता हूं कि मैं अपने देश और अपने देशवासियों की इज्‍जत को धूल में मिलाऊंगा। उनकी बेइज्‍जती और बुराई में ही मेरा सुख निहित है।

1 comments:

Pratik said...

न जाने इस देश में और कितने ऐसे बाबूभाई कटारा हैं !